


🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | बदायूं चर्च संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट की सख्ती, डीएम-एसएसपी से मांगा जवाब; अवैध कब्जा हटाने और आदेशों के अनुपालन पर न्यायालय की कड़ी निगरानी
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यूपी अल्पसंख्यक आयोग के आदेशों के अनुपालन पर सरकार से जवाब तलब, अवैध कब्जा हटाने और संपत्ति का कब्जा बहाल होने की जानकारी; 16 जुलाई को अगली सुनवाई
बदायूं/प्रयागराज | वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट
बदायूं स्थित चर्च संपत्ति विवाद अब पूरी तरह न्यायिक निगरानी में पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित रिट-सी संख्या 23966/2026 (Executive Board of The Methodist Church in India बनाम State of Uttar Pradesh एवं अन्य) में न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के बाद इस मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। न्यायालय ने पहले राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग द्वारा 19 अप्रैल 2024 को पारित आदेश का अनुपालन अब तक क्यों नहीं किया गया, वहीं बाद की सुनवाई में जिला प्रशासन द्वारा अवैध कब्जा हटाने और संपत्ति का कब्जा बहाल किए जाने की जानकारी भी रिकॉर्ड पर आई।
⚖️ 17 जून को हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
17 जून 2026 को हुई सुनवाई में माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं माननीय न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के 19 अप्रैल 2024 के आदेश के अनुपालन के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया तो जिलाधिकारी बदायूं और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूं को अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा।
इस आदेश को पूरे मामले में न्यायालय के गंभीर रुख के रूप में देखा जा रहा है।
🏛️ 7 जुलाई की सुनवाई में प्रशासन ने रखा पक्ष
इसके बाद 7 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं माननीय न्यायमूर्ति इन्द्रजीत शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष हुई।
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत निर्देशों के अनुसार न्यायालय को बताया गया कि—
- संबंधित चर्च संपत्ति पर किसी प्रकार का अवैध निर्माण नहीं होने दिया गया।
- कथित अवैध कब्जा हटाकर संपत्ति का वास्तविक कब्जा याचिकाकर्ता को उपलब्ध करा दिया गया है।
हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि परिसर में स्थित एक आर्म्स शॉप अब भी बंद अवस्था में है और उसका कब्जा अभी तक नहीं सौंपा गया है। इस संबंध में पूर्व में जिलाधिकारी को आवेदन भी दिया जा चुका है।
📑 जिलाधिकारी को दिए गए निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी/कलेक्टर बदायूं को निर्देश दिया कि 6 जून 2026 के लंबित आवेदन पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर उसका निस्तारण किया जाए।
साथ ही न्यायालय ने अगली सुनवाई तक अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
राज्य विधि अधिकारी को आदेश की प्रति तीन दिन के भीतर जिलाधिकारी तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
📄 नगर मजिस्ट्रेट का नोटिस भी बना चर्चा का विषय
इसी बीच नगर मजिस्ट्रेट बदायूं द्वारा जारी एक नोटिस भी चर्चा में है, जिसमें प्रशासनिक कार्रवाई और परिसर से अतिक्रमण हटाने के निर्देशों का उल्लेख दिखाई देता है।
हालांकि इस नोटिस की कानूनी व्याख्या और प्रभाव भी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा इसका अंतिम मूल्यांकन न्यायालय और संबंधित प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा।
🔍 दस्तावेजों और ध्वस्तीकरण को लेकर भी विवाद
मामले से जुड़े अन्य पक्षों का दावा है कि संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों, स्वामित्व और कथित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को लेकर भी कई प्रश्न अभी शेष हैं।
कुछ पक्षों का आरोप है कि न्यायालय के समक्ष सभी तथ्य प्रस्तुत नहीं किए गए तथा विचाराधीन प्रकरण के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई की गई। दूसरी ओर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनसे जुड़े मुद्दे भी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
⚖️ अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा
विधि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में पूरा मामला न्यायिक विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी पक्ष के आरोप या दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। संपत्ति के स्वामित्व, प्रशासनिक कार्रवाई, कब्जा, दस्तावेजों की वैधता तथा अन्य विवादित बिंदुओं पर अंतिम निर्णय केवल सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही दिया जाएगा।
फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के बाद पूरे मामले पर प्रदेश भर के विधिक और प्रशासनिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
⚖️ महत्वपूर्ण कानूनी अस्वीकरण
यह समाचार इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपलब्ध न्यायिक आदेशों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में जहां संबंधित पक्षों के दावों का उल्लेख है, उन्हें आरोप या दावा के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। किसी भी व्यक्ति, संस्था या अधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी अथवा किसी विवाद का अंतिम निर्धारण केवल सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों एवं अभिलेखों के परीक्षण के उपरांत ही किया जाएगा। समाचार का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही और उपलब्ध तथ्यों को जनहित में प्रस्तुत करना है।
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✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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